आमलकी(amalki)
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आयुर्वेद में औषधि वर्गीकरण जब हम करते हैं तो आमलकी(amalki) को सर्वश्रेष्ठ स्थान उसमें दिया गया है।आचार्य चरक ने भी कहा है सूत्रस्थान के चौथे अध्याय में वयःस्थापन महाकषाय में आमलकी को प्रथम माना। वयःस्थापनाम् आमलकी।
वयःस्थापन का अर्थ होता है वय को स्थापित करे। यानी दूसरे तरीके से हम ऐसे भी कह सकते हैं कि बुढ़ापे को रोके और जवानी हमारी बरकरार रखे।
आमलकी(amalki) को धात्री, अमृतफला, वृष्या, ये इसके पर्याय माने गए हैं। आधुनिक विज्ञान इसे Indian Gooseberry और लैटिन में वनस्पति भाषा में Phyllanthus emblica Linn. कहा है।
ये एक ऐसा फल है जिसमें लवण रस नहीं है, बाकी पाँचों रस मौजूद हैं, जैसे मधुर, अम्ल, कटु, कषाय, तिक्त, ये सब इसमें उपलब्ध हैं।

शास्त्रीय नाम और निरुक्ति
आमलकी(amalki) जो शब्द है, इसकी निरुक्ति अम् प्लस लकी, अर्थात जो शरीर में आम को लकड़ी के समान नष्ट करे, उसे हम आमलकी कहते हैं।
पर्यायवाची:
धात्री, धात्री के समान जो शरीर का पालन करे, माता जैसी रक्षा करने वाली।
अमृतफला, जिसका जो फल है वो अमृत के समान लाभकारी हो।
वृष्या, जो वृष्य कर्म करे, यानी शुक्र धातु को बढ़ाने का काम करे।
वयस्था, जो हमारी उम्र को स्थिर रखे, जवानी बरकरार रखे।
शिवा, पथ्या, रोचनी, जो कल्याणकारी हो और रुचि देने वाली हो।
आमलकी(amalki) का वानस्पतिक परिचय
आमलकी का लैटिन नाम Emblica officinalis Gaertn.। फैमिली Phyllanthaceae।
स्वरूप: आमलकी(amalki) का जो वृक्ष है, पतझड़ वाला और एक मध्यम आकार का 10 से 18 मीटर ऊँचा वृक्ष होता है। पत्ते इमली के पत्तों के समान छोटे-छोटे होते हैं।
फल: आमलकी का जो फल है, वो गोलाकार, हल्का हरा-पीला, छह रेखाओं से विभाजित, कच्चा होने पर कठोर और पकने पर नरम और आम बोलचाल की भाषा में इसे आँवले का फल भी कहते हैं।
प्राप्ति स्थान: पूरे भारत में यह पाया जाता है, विशेषकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु के पतझड़ वाले वनों में।
भेद: राजनिघंटु के अनुसार आमलकी(amalki) के दो भेद हैं, वन्य आमलकी और ग्राम्य आमलकी। औषधीय प्रयोग में ग्राम्य श्रेष्ठ बताई गई है।
रसपञ्चक – आयुर्वेद के आधार पर
(amalki)रस: अम्ल रस यह प्रधान है, बाकी अम्ल, मधुर, कटु, तिक्त, कषाय इसमें रस होते हैं, लवण रस इसमें नहीं होता है।
गुण: लघु, रूक्ष, शीत।
वीर्य: शीत वीर्य।
विपाक: मधुर विपाक।
प्रभाव: रसायन।
दोष कर्म: त्रिदोषहर है लेकिन मुख्यतया पित्त शामक है।
विशेष विचार: अम्ल रस होते हुए भी यह शीत वीर्य है और यह एक अपवाद की श्रेणी में आता है। यह आमलकी की प्रभावजन्य विशेषता मानी गई है।
आमलकी(amalki) के प्रमुख कार्य
आँवला अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि है। ये वयःस्थापन और रसायन कर्म जैसे बहुत से काम करती है। तो हम इसे स्टेप बाय स्टेप एक-एक पॉइंट के आधार पर समझेंगे।
1. वयःस्थापन और रसायन कर्म: ये सबसे प्रमुख कर्म है आँवला का, क्योंकि इससे बुढ़ापा, झुर्रियाँ और थकान को रोकने का काम आमलकी करती है।
2. केश्य कर्म: बालों के लिए आज के समय सबसे ज़्यादा खोजे जाने वाला जो विषय है, वो ये है कि बाल जो है झड़ते बहुत हैं लोगों के, जिन्हें आयुर्वेद में खालित्य और पालित्य भी कहते हैं। तो इसके लिए जो बैद्यनाथ का आमलकी रसायन है और भी तरह के बाजार में प्रोडक्ट मिलते हैं जिनमें आँवला मुख्य रूप से होता है, क्योंकि आमलकी जो है शीत वीर्य है और पित्त को शांत करने वाली है, बालों की जड़ों को मजबूत करती है।
3. चक्षुष्य कर्म: आँखों की रोशनी के लिए आँवला सर्वश्रेष्ठ है और ये त्रिफला का मुख्य घटक द्रव्य भी है।
4. प्रमेहहर कर्म: मधुमेह में जब आपको बार-बार पेशाब की शिकायत होती है और कमजोरी जैसा लगता है तो उसमें आँवले का चूर्ण बहुत ही लाभदायक है।
5. रक्तपित्तहर: नाक में खून आना, मसूड़ों में खून आना, जैसे रोगों में रक्त को ये शुद्ध करने का काम आमलकी, यानी आँवला करती है।
6. स्त्री रोगों में: श्वेत प्रदर, अनियमित पीरियड में इसका उपयोग होता है, गर्भाशय की गर्मी को शांत कर माहवारी को नियमित करने का काम भी करती है।
प्रयोज्य अंग, मात्रा और अनुपान(amalki)
आँवला के जो प्रयोज्य अंग और उसकी मात्रा और उसके जो भी अनुपान हैं, हम क्रमशः समझेंगे।
प्रयोज्य अंग: फल।
आँवला(amalki) की चूर्ण की मात्रा 3 से 6 ग्राम दिन में 2 बार।
आँवला के स्वरस की मात्रा 10 से 20 ml।
आँवला की रसायन 5 से 10 ग्राम सुबह-शाम खाली पेट।
अनुपान मधु या घृत।
एमिल आँवला(amalki) की टैबलेट 1 से 2 टैबलेट दिन में 2 बार।
अनुपान का महत्व: मधु के साथ कफज रोगों में और घृत के साथ पित्तज रोगों में लाभकारी माना गया है।
महत्वपूर्ण योग: च्यवनप्राश अवलेह, त्रिफला चूर्ण, आँवला की रसायन, धात्री लौह, धात्र्यरिष्ट।
आँवला(amalki) के चूर्ण और आँवला की रसायन में क्या अंतर है?
दोस्तों, अब हम आँवला के चूर्ण और आँवला की रसायन के अंतर के बारे में समझेंगे। जैसा कि चूर्ण और रसायन दोनों में नाम फर्क है, तो इनमें अंतर भी बहुत ज़्यादा है।
आँवला की चूर्ण फल को सुखाकर पीसकर बनाया जाता है, और आँवला की रसायन चूर्ण को 21 बार आँवला के स्वरस की भावना देकर बनाया जाता है।
सामान्य कर्म: आँवला की चूर्ण जो है सामान्य कर्म के लिए काम में आता है, आँवला की रसायन योगवाही और रसायन कर्म अधिक करता है।
आँवला की चूर्ण रोज़ाना के लिए उपयोगी है, लेकिन आँवला की रसायन विशेषतः रसायन चिकित्सा के लिए उपयोगी बताया गया है।
आमलकी(amalki) का सेवन कैसे करें – सही विधि और मात्रा
आमलकी(amalki) का सेवन कैसे करना होता है, ये भी हमारे लिए जानना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर हम गलत तरीके से इसका सेवन करेंगे तो सर्दी-जुकाम ये कम होने की जगह बढ़ जाएगी। तो आयुर्वेद में आमलकी को खाने के पांच मुख्य तरीके के बारे में हम बात करेंगे।
1. कच्चे फल के रूप में
सर्दियों में रोज सुबह एक से दो ताजे आंवले को काले नमक के साथ हम खा सकते हैं। ये सबसे अच्छा रसायन है और आँखों की रोशनी को भी बढ़ाता है। B.A.M.S परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि ताजा आमलकी सबसे ज़्यादा लाभकारी होती है।
2. आमलकी चूर्ण के रूप में
आमलकी चूर्ण की मात्रा हमने ऊपर भी देखी थी, तीन से छह ग्राम सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ हमें लेना चाहिए। यदि आपको पित्त की समस्या है, जैसे जलन, अम्लपित्त, तो इसे घी के साथ आप लेंगे तो बहुत ही फायदेमंद है। अगर कफ की समस्या है तो शहद के साथ और अगर वात की समस्या है तो मिश्री के साथ आमलकी को लेना लाभकारी माना जाता है। यही अनुपान नियम परीक्षा में बार-बार पूछा भी जाता है।
3. आमलकी(amalki) स्वरस के रूप में
दस से बीस ml ताजा रस शहद मिलाकर पीने से हमारे शरीर में रक्त, पित्त, नाक से खून आना और मुँह के छालों में आराम मिलता है। मधुमेह के रोगियों के लिए आमलकी और हल्दी का स्रावस मिलाकर देना भी एक प्रसिद्ध योग है।
4. आमलकी रसायन के रूप में
ये सबसे सशक्तशाली रूप है आमलकी का। वैद्यनाथ आमलकी रसायन को पांच से दस ग्राम सुबह खाली पेट लेना लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह बालों के लिए, इम्युनिटी के लिए और बुढ़ापा रोकने के लिए सबसे ज़्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट है। रसायन को इक्कीस या इकतीस भावना देकर बनाया जाता है, इसलिए यह चूर्ण से दस गुना ज़्यादा असरदार होता है।
5. आमलकी(amalki) मुरब्बा और च्यवनप्राश के रूप में
बच्चों और बुजुर्गों को चूर्ण कड़वा लगता है, उनके लिए मुरब्बा सबसे अच्छा होता है। रोज एक मुरब्बा दूध के साथ लेने से याददाश्त और ताकत बढ़ती है। च्यवनप्राशका मुख्य घटक आमलकी ही है, इसलिए सर्दियों में एक चम्मच चूर्णप्रास दूध के साथ लेना पूरे परिवार के लिए रसायन का काम करता है।
आधुनिक शोध(amalki)
केमिकल कम्पोज़िशन की बात करें तो इसमें(amalki) विटामिन C होता है, जो लगभग 600 से 700 mg प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। यानी हम ये कह सकते हैं कि संतरे से 20 गुना ज़्यादा।
फार्माकोलॉजिकल एक्शन सबसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, इम्यूनोमॉड्यूलेटर, हेपाटोप्रोटेक्टिव पाया जाता है।
सावधानी और अपथ्य
आमलकी शीतवीर्य होने से सर्दी-जुकाम वाले रोगी को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
विरुद्ध आहार: दही और मूली के साथ इसका सेवन कभी नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
आमलकी एक ऐसी एकल औषधि है जो केवल अकेले ही रसायन, केश्य, चक्षुष्य और त्रिदोषहर मानी गई है।
डिस्क्लेमर: यह लेख शिक्षा के उद्देश्य से है। किसी भी रोग में सेवन से पहले अपने आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। अपने मन से डॉक्टर नहीं बनें।
🌿 आमलकी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
आमलकी का वानस्पतिक नाम क्या है?
→ Phyllanthus emblica Linn.; लैटिन नाम Emblica officinalis Gaertn.
आमलकी का कुल क्या है?
→ यूफोर्बिएसी (Euphorbiaceae)।
आमलकी के पर्यायवाची क्या हैं?
→ धात्री, अमृतफला, वृष्या, वयस्था, शिवा।
आचार्य चरक ने आमलकी को किस महाकषाय में रखा है?
→ वयःस्थापन महाकषाय।
आमलकी का प्रयोज्य अंग क्या है?
→ फल; फल प्रमुख प्रयोज्य अंग है। पत्र, बीज एवं जड़ का भी प्रयोग किया जाता है।
आमलकी में कितने रस होते हैं?
→ पाँच रस—अम्ल, मधुर, कटु, तिक्त एवं कषाय; लवण रस नहीं होता। अम्ल रस प्रधान है।
आमलकी के गुण क्या हैं?
→ लघु, रूक्ष एवं शीत।
आमलकी का वीर्य क्या है?
→ शीत वीर्य।
आमलकी का विपाक क्या है?
→ मधुर विपाक।
आमलकी का प्रभाव क्या है?
→ रसायन प्रभाव।
आमलकी की दोषघ्नता क्या है?
→ त्रिदोषशामक; विशेषतः पित्तशामक।
अम्ल रस होते हुए भी आमलकी शीत वीर्य है—यह किसका उदाहरण है?
→ प्रभाव का उदाहरण।
आमलकी के मुख्य कर्म क्या हैं?
→ रसायन, वयःस्थापन, चक्षुष्य एवं केश्य।
त्रिफला में कौन-कौन से द्रव्य होते हैं?
→ हरीतकी, बिभीतकी एवं आमलकी।
च्यवनप्राश का मुख्य घटक क्या है?
→ आमलकी।
आमलकी रसायन कैसे बनता है?
→ आमलकी चूर्ण को आमलकी के ही स्वरस में 31 बार भावना देकर बनाया जाता है।
आमलकी चूर्ण की मात्रा कितनी है?
→ 3–6 ग्राम।
धात्री लौह किस रोग में प्रसिद्ध है?
→ पाण्डुरोग में।
आमलकी किस ऋतु में पाई जाती है?
→ शरद ऋतु में इसके फल आते हैं।
आमलकी में सबसे अधिक क्या पाया जाता है?
→ विटामिन C (लगभग 600–700 mg/30 ग्राम)।
आमलकी के केमिकल कॉन्स्टिट्यूएंट क्या हैं?
→ गैलिक एसिड, एलैजिक एसिड, टैनिन एवं फाइलेम्ब्लिन।
आमलकी का विरुद्ध आहार क्या है?
→ दही एवं मूली के साथ।
भावप्रकाश के अनुसार आमलकी के दो भेद कौन-से हैं?
→ वन्य आमलकी एवं ग्राम्य आमलकी।
आमलकी के दोनों भेदों में श्रेष्ठ कौन-सी है?
→ ग्राम्य आमलकी।
आमलकी का पर्याय ‘धात्री’ क्यों है?
→ क्योंकि यह माता के समान शरीर का धारण एवं पोषण करती है।
बैद्यनाथ आमलकी रसायन फॉर हेयर ग्रोथ किस कर्म पर आधारित है?
→ केश्य कर्म पर।
आमलकी रसायन इर्रेगुलर पीरियड में कैसे काम करता है?
→ रक्तपित्त शामक एवं गर्भाशय को बल प्रदान करने के कारण।
आमलकी अवलेह का उपयोग कहाँ होता है?
→ रक्तपित्त एवं अम्लपित्त में।
आमलकी का अंग्रेज़ी नाम क्या है?
→ Indian Gooseberry।
अनुपान भेद से आमलकी का फल/कर्म क्या है?
→ मधु के साथ कफहर, घृत के साथ पित्तहर एवं मिश्री के साथ वातहर।
क्या आमलकी(amalki) रोज खा सकते हैं?
हाँ, 1-2 आंवला रोज खाना रसायन का काम करता है, लेकिन सर्दी-जुकाम में अधिक न लें.
आमलकी(amalki) का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
यह सबसे बड़ा एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी बूस्टर है, विटामिन C संतरे से 20 गुना ज्यादा होता है.
बालों के लिए आमलकी(amalki) कैसे उपयोग करें?
आमलकी रसायन या आंवला तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है और खालित्य-पालित्य को रोकता है.
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✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.
📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.
