Amaltas ke Fayde – आयुर्वेद में इसे आरग्वध क्यों कहते हैं ?
अमलतास को आयुर्वेद में आरग्वध कहते हैं, जिसका मतलब है रोगों का वध करने वाला। दोस्तों, आज का हमारा जो औषधीय पौधा है, वो है अमलतास। आज हम Amaltas ke Fayde के बारे में आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी देखेंगे और आज के समय में इसको हम कहाँ उपयोग में ले सकते हैं और कहाँ पर हमें सावधानी रखनी चाहिए। ये पूरी जानकारी हम आज के इस लेख में सीखेंगे।

अमलतास का आयुर्वेदिक परिचय
विभिन्न भाषाओं में अमलतास के नाम। आयुर्वेद के अलावा भारतवर्ष में मराठी, गुजराती, इन सब भाषाओं में अमलतास को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, तो हम उसके बारे में अच्छे से समझते हैं।
संस्कृत में – आरग्वद, राजवृक्ष, व्याधिघात, दीर्घफल।
हिंदी – अमलतास, बंदर लाठी।
मराठी – बाहेवा।
गुजराती – गरमालो।
बंगाली – सोनालू।
अमलतास के पर्याय इस प्रकार हैं –
- आरग्वध – रोगों को नष्ट करने वाला
- राजवृक्ष – एक सुंदर वृक्ष
- चतुरंगुल – पर्वों का प्रमाण चार अंगुल होने के कारण
- व्याधिघात – रोगों को दूर करने वाला
- कृतमाल – पुष्पों की माला धारण करने वाला
- दीर्घफल – जिसके फल लंबे होते हैं
अमलतास का अंग्रेजी नाम Purging Cassia है और लैटिन नाम Cassia fistula है।
अमलतास का वानस्पतिक परिचय
अमलतास(Amaltas ke Fayde) का वृक्ष मध्यम प्रमाण का होता है। यह 25 से लेकर 30 फुट तक ऊँचा हो सकता है। इसकी छाल भूरे वर्ण की होती है।अमलतास के पत्ते
अमलतास के पत्ते लगभग एक फुट लंबे होते हैं, जिसमें 8 से 16 अंडाकार पत्रक लगे रहते हैं जो 2 से 7 इंच लंबे होते हैं।
अमलतास के फूल
इसकी पुष्पमंजरी पत्ती जितनी लंबी होती है और नीचे लटकी हुई होती है, जिस पर चमकीले पीले रंग के फूल लगते हैं।
अमलतास के फल
इसका फल सबसे खास और आयुर्वेद में उपयोगी माना गया है। यह लगभग एक से दो फुट लंबा, बेलनाकार, काले-भूरे रंग का होता है। इसी को ही बंदर लाठी भी कहते हैं। फली के अंदर पच्चीस से सौ तक चमकीले काले-भूरे रंग के बीज होते हैं, जो गहरे भूरे और चिपचिपे गूदे में लिपटे रहते हैं और दोस्तों, यही गूदा असली दवा है, जिसे आयुर्वेद में फल मज्जा भी कहते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार गुण-धर्म
रस – मधुर,
गुण – मृदु, स्निग्ध, गुरु,
वीर्य – शीत,
विपाक – मधुर।
यह मधुर और स्निग्ध होने के कारण वात और पित्त का शमन करता है। रेचन होने के कारण यह कोष्ठ में जमें पित्त और कफ का शोधन भी करता है।
प्रयोज्य अंग – फल मज्जा
मात्रा – फल मज्जा 5 से 10 ग्राम,
पुष्प 5 से 10 ग्राम,
विरेचन के लिए 10 से 20 ग्राम,
क्वाथ 50 से 100 मिली तक
विशिष्ट योग – आरग्वधादि तेल, आरग्वधादि क्वाथ, आरग्वधारिष्ट
Amaltas ke Fayde – 7 मुख्य लाभ
1. कब्ज में Amaltas ke Fayde
अमलतास का जो गूदा है, वह कब्ज में बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यह बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में भी उचित मात्रा में सुरक्षित माना गया है, लेकिन इसकी मात्रा चिकित्सक द्वारा ही निर्धारित की जानी चाहिए।
2. पेट की गर्मी और एसिडिटी में Amaltas ke Fayde
अमलतास शीत वीर्य वाला होता है, इसलिए यह पेट में जलन, एसिडिटी और बुखार में राहत देने में सहायक माना जाता है।
3. त्वचा रोगों में Amaltas ke Fayde
अमलतास का गूदा और फल मज्जा त्वचा की एलर्जी, खुजली और दाद में फायदेमंद मानी जाती है।
4. जोड़ों के दर्द और सूजन में Amaltas ke Fayde
पत्तों का काढ़ा या गूदे का सेवन वात और पित्त को शांत करने में सहायक माना जाता है। जब वात शांत होता है तो जोड़ों के दर्द और सूजन में आराम मिलता है।
5. गले के रोग और कफ में Amaltas ke Fayde
इसके फूलों का गुलकंद या शरबत गले की खराश और सूखी खाँसी में फायदेमंद माना जाता है। घर पर बनाना कठिन है, इसलिए वैद्य की सलाह से ही सेवन करें।
6. घाव होने पर Amaltas ke Fayde
पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरने में सहायता मिल सकती है और दर्द भी कम हो सकता है।
7. मधुमेह में Amaltas ke Fayde
इसके बीजों और छाल पर आधुनिक समय में शोध भी हुआ है। बताया गया है कि यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, लेकिन वैद्य की सलाह से ही लेना चाहिए।
अमलतास का गूदा कैसे निकालें
(1)अमलतास(Amaltas ke Fayde) के फल को जब हम तोड़ते हैं तो उसके अंदर से काला चिपचिपा गूदा निकलता है और आयुर्वेद में हम इसे ही औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिसे हम मुख्यतः फल मज्जा कहते हैं।
(2)ताजा फली को लेकर उसे हम तोड़ेंगे, उसके अंदर से गूदा निकालते हैं, फिर बीजों को अलग करते हैं। गूदे को थोड़े से गुनगुने पानी में हम घोलकर फिर उसे छान लेंगे। अब यह उपयोग के लिए एकदम तैयार है।
और गूदे की जो मात्रा है, जो हमने ऊपर पहले ही लिख भी दी है, 5 से 10 ग्राम और चूर्ण की मात्रा की बात करें तो 3 से 6 ग्राम और जो क्वाथ है, उसका 50 से 100 ml तक हम दे सकते हैं। वैसे चिकित्सक की सलाह के अनुसार और बच्चों में मात्रा आधी कर देनी चाहिए।
अमलतास के फूलों का शरबत कैसे बनता है?
अमलतास(Amaltas ke Fayde) के ताजे फूलों को अच्छे से धोकर पानी में उबालकर, उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर शरबत बनाया जाता है। यह गर्मी में लू से बचाता है और पेट को भी ठंडक प्रदान करता है।
अमलतास में सावधानी और नुकसान
जैसे हर चीज के फायदे होते हैं तो साथ में कुछ सावधानियाँ भी हमें रखनी होती हैं। उसी तरह से अमलतास के फायदे के साथ-साथ हमें कुछ सावधानियाँ भी रखनी जरूरी है। इसे हम पॉइंट वाइज समझेंगे।
(1) अगर हम ज्यादा मात्रा में अमलतास लेते हैं तो हमें लूज़ मोशन हो सकता है और ऐसा भी हो सकता है कि पेट में मरोड़े उत्पन्न हों, इसलिए कभी भी 20 ग्राम से ज्यादा गुदा एक बार में अमलतास का नहीं लेना चाहिए।
(2) लूज़ मोशन वाले व्यक्ति को अमलतास कभी नहीं देना चाहिए, क्योंकि अगर दस्त उसे पहले से लग रहा है और अगर आप उसे अमलतास देंगे तो फिर गंभीर समस्या उत्पन्न करेगी।
(3) हमेशा ताजे गूदे का उपयोग करें, बहुत पुराना गूदा नहीं हो और अगर पुराना गूदा आप ले रहे हैं तो वो उल्टा नुकसान करेगा। अगर काला पड़ गया है या बदबू आ रही है तो उसे फेंक दें।
(4) गर्भवती महिला और पांच साल से छोटे बच्चे को बिना चिकित्सक की सलाह के अमलतास नहीं देना चाहिए।
(5) इसे लगातार पंद्रह दिन से ज्यादा नहीं लेना चाहिए, बीच में गैप जरूर देना चाहिए।
और एक महत्वपूर्ण बात, अमलतास को लेने से पहले हमें चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि व्यक्ति की आयु व प्रकृति के आधार पर ही उसकी मात्रा निर्धारित होती है और यही यह काम चिकित्सक कर सकता है।
अमलतास के पत्ते का काढ़ा जोड़ों के दर्द में कैसे बनाएं और इसे पिएं
(1)अमलतास(Amaltas ke Fayde) के पत्तों का जो काढ़ा है, वो जोड़ों के दर्द और सूजन में बहुत उपयोगी है और हमने ये बात ऊपर पहले शॉर्ट में जानी भी है। ऐसा क्यों है? क्योंकि आयुर्वेद में इसे वात शमन उपाय के रूप में बताया गया है।
(2)अगर आप भी घुटनों के दर्द या कमर के दर्द, पुरानी सूजन से परेशान हैं तो अमलतास के फायदे का यह प्रयोग आपके काम बहुत आ सकता है।
(3)काढ़ा बनाने के लिए 10 से 15 ग्राम ताजे कोमल पत्ते हमें लेना चाहिए, इन्हें अच्छे से धोकर 400 ml पानी में डाल देना है। अब इसे धीमी आँच पर इतना उबालना है कि पानी जो है वो आधा रह जाए, यानी 200 ml के आसपास। फिर इसे छानकर गुनगुना रहने पर इसमें 2 ग्राम सोंठ के चूर्ण और सेंधा नमक मिलाकर मिला सकते हैं।
(4)इस काढ़े को सुबह-शाम खाली पेट, एक खाना खाने के एक घंटा पहले हम ले सकते हैं। यह अंदर से वात को शांत करता है और जोड़ों में जमी हुई अकड़न को कम करने में मदद करता है।
(5)कई वैद्य इसके साथ ही इसे काढ़े से सिकाई करने की भी सलाह दे सकते हैं। अगर घुटने में सूजन है तो एक साफ कपड़ा काढ़े में भिगोकर हल्की सिकाई करें,
लेकिन ध्यान रहे पत्तों का काढ़ा बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं पीना चाहिए। दिन में एक बार 50 से 100 ml काफी है। लगातार 10 से 12 दिन से ज्यादा बिना वैद्य की सलाह से इसका सेवन नहीं करें।
अमलतास (Amaltas ke Fayde)के बारे में पूछे जाने वाले सवाल
उत्तर: शीत।
उत्तर: हाँ, लेकिन मात्रा वैद्य की सलाह से ही दें।
उत्तर: हाँ, इसकी सब्जी और शरबत बनाया जाता है।
✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.
📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.
