Written by Ayurved Study Hub Team | Reviewed by Our Ayurveda Expert Panel
Hamare sabhi lekh hamari expert team dwara likhe aur janche jate hain taaki aapko sahi aur puri jankari mile. Ye jankari keval shiksha ke liye hai.
Namaskar dosto, ye Charak Samhita Important Questions Part-2 hai jo BAMS aur Ayurvedic Staff Nurse pariksha ke liye. इसमें भी चरक संहिता से संबंधित महत्वपूर्ण क्वेश्चन शामिल हैं। आने वाले पार्ट में हम विभिन्न आचार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को देखेंगे।
इसमें हम चरक संहिता से जुड़े प्रमुख स्थानों के बारे में जानेंगे और उन प्रमुख स्थानों में किस प्रकार के विषयों का वर्णन किया गया है, यह भी समझेंगे। साथ ही, चरक संहिता से जुड़े प्रमुख आचार्यों और इसकी प्रमुख टीकाओं के बारे में भी जानेंगे।
अगर आपको इससे जुड़ी कोई और जानकारी चाहिए या कोई प्रश्न पूछना है, तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए। हमारे इंस्टाग्राम से जुड़िए, हमारे फेसबुक पेज से जुड़िए और हमारे यूट्यूब चैनल को भी जरूर फॉलो कीजिए, ताकि हम आपसे जुड़े रहें।
![]() |
| Ayurveda History MCQ Part 2 – आयुर्वेद के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण MCQ प्रश्नों का अभ्यास करें और अपनी परीक्षा की तैयारी को बेहतर बनाएं। |
और अगर आपका कोई प्रश्न है, तो आप बेझिझक हमसे पूछ सकते हैं।
अभी हमारा आयुर्वेद हिस्ट्री का टॉपिक चलेगा, उसके बाद हम दूसरे टॉपिक पर जाएंगे, क्योंकि आयुर्वेद हिस्ट्री से एग्जाम में काफी महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं।
तो चलिए, शुरू करते हैं आज का पार्ट-2 –
Ayurved History Part 2
चरक संहिता से संबंधित महत्वपूर्ण MCQ
20. चरक संहिता के प्रतिसंस्कर्ता किसे माना गया है?
सही उत्तर: चरकप्रमुख व्याख्या: आचार्य चरक को चरक संहिता का प्रतिसंस्कर्ता माना गया है। उन्होंने अग्निवेश तंत्र का प्रतिसंस्कार और संशोधन किया।
21. निम्न सभी में से आत्रेय के शिष्य एक को छोड़कर सभी हैं, वह कौन-सा एक है?
सही उत्तर: चक्रपाणि और चरकप्रमुख व्याख्या: अग्निवेश, पराशर, जतुकर्ण, भेल, हारित और सारपाणि को आत्रेय के शिष्यों में माना जाता है। चक्रपाणि और चरक आत्रेय के प्रत्यक्ष शिष्यों में शामिल नहीं हैं।
22. चरक संहिता के लेखक कौन हैं?
सही उत्तर: अग्निवेशप्रमुख व्याख्या: इस प्रश्न में हम यह समझ सकते हैं कि चरक संहिता के मूल लेखक आचार्य अग्निवेश हैं और चरक संहिता के प्रतिसंस्कर्ता आचार्य चरक बताए गए हैं।
23. चरक संहिता की प्रमुख पुनर्संस्करण लिखने किसे माना गया है?
सही उत्तर: दृढ़बलप्रमुख व्याख्या: आचार्य दृढ़बल को चरक संहिता के प्रमुख पुनर्संस्कर्ता के रूप में माना जाता है। उन्होंने ग्रंथ के लुप्त अंशों की पूर्ति एवं पुनर्संस्करण का कार्य किया।
24. चरक संहिता की कौन-सी टीकाएँ निम्नलिखित हैं?
सही उत्तर: सभीप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता पर आयुर्वेददीपिका, चरकन्यास और निरन्तरपद व्याख्या जैसी टीकाएँ उपलब्ध हैं। आयुर्वेददीपिका के रचयिता चक्रपाणिदत्त, चरकन्यास के भट्टार हरिश्चन्द्र तथा निरन्तरपद व्याख्या के जेज्जट माने जाते हैं।
25. चरक संहिता में कुल कितने स्थान, अध्याय व श्लोक क्रमशः माने गए हैं?
सही उत्तर: 8, 120, 9225प्रमुख व्याख्या: चरक संहिता में कुल 8 स्थान और 120 अध्याय माने गए हैं। इसमें लगभग 9225 श्लोकों का वर्णन मिलता है।
26. चरक संहिता में किस स्थान के अंदर मृत्युसूचक लक्षण और इन्द्रिय-उपशय का वर्णन है?
सही उत्तर: इन्द्रिय स्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता के इन्द्रिय स्थान में इन्द्रियों से संबंधित विषयों के साथ-साथ अरिष्ट यानी मृत्युसूचक लक्षणों का वर्णन किया गया है।
27. चरक संहिता के किस स्थान में मात्रा (Measurement), दोषों का प्रमाण, आहार्य-अनुपान विधि व रस का वर्णन मिलता है?
सही उत्तर: विमान स्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता के विमान स्थान में मात्रा, दोषों के प्रमाण, आहार एवं अनुपान की विधि तथा रस आदि से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों का वर्णन मिलता है।
28. चरक संहिता के किस अध्याय में वमन एवं विरेचन द्रव्यों के कल्प (फॉर्मुलेशन्स) का वर्णन मिलता है?
सही उत्तर: कल्पस्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता के कल्पस्थान में वमन एवं विरेचन के लिए उपयोग किए जाने वाले द्रव्यों तथा उनके विभिन्न कल्पों (Formulations) का वर्णन किया गया है।
वैसे आयुर्वेद हिस्ट्री काफी बड़ा टॉपिक है, इसलिए हम इसे MCQ के माध्यम से देखेंगे कि किस तरह के महत्वपूर्ण प्रश्न बन रहे हैं और किन-किन टॉपिक्स को हमें अच्छे से टार्गेट करना है।
अगर हम आयुर्वेद हिस्ट्री को पूरी तरह कवर करने बैठेंगे, तो हमारा आर्टिकल काफी लंबा हो जाएगा। इसलिए हम अभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं।
फिर भी अगर आपको लगता है कि इसमें कोई महत्वपूर्ण टॉपिक या प्रश्न छूट रहा है, तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा।
MCQ START-
29. शरीर रचना, गर्भशास्त्र एवं आत्मा का वर्णन चरक संहिता के किस स्थान में मिलता है?
सही उत्तर: शरीर स्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता के शरीर स्थान में शरीर रचना, गर्भ की उत्पत्ति एवं विकास तथा आत्मा से संबंधित विषयों का वर्णन मिलता है।
30. पंचकर्म की सिद्धि, बस्ति कर्म की विधियाँ एवं व्यापद का वर्णन चरक संहिता के किस स्थान में मिलता है?
सही उत्तर: सिद्धि स्थानप्रमुख व्याख्या: सिद्धि स्थान में पंचकर्म की सिद्धि, बस्ति कर्म की विभिन्न विधियों तथा बस्ति से संबंधित व्यापद और उनके प्रबंधन का वर्णन मिलता है।
31. निम्नलिखित स्थानों में से चरक संहिता का कौन-सा स्थान नहीं है? कृपया असंगत चुनें।
सही उत्तर: उत्तरतंत्रप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता में निदान स्थान, विमान स्थान और सिद्धि स्थान पाए जाते हैं। उत्तरतंत्र चरक संहिता का स्थान नहीं है।
32. अगर चरक संहिता में प्रथम स्थान की बात करें तो कौन-सा प्रथम स्थान है?
सही उत्तर: सूत्र स्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता का प्रथम स्थान सूत्र स्थान है। इसमें आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों, आहार, स्वास्थ्य और चिकित्सा से संबंधित आधारभूत विषयों का वर्णन मिलता है।
33. शरीर, गर्भ एवं आत्मा से संबंधित विषय किस स्थान में चरक संहिता में मिलते हैं?
सही उत्तर: शरीर स्थानप्रमुख व्याख्या: शरीर स्थान में शरीर, गर्भ की उत्पत्ति एवं विकास तथा आत्मा से संबंधित महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक सिद्धांतों का वर्णन किया गया है।
34. चरक संहिता के अनुसार पंचकर्म की सिद्धि एवं उससे संबंधित विषय किस स्थान में देखने को मिलते हैं?
सही उत्तर: सिद्धि स्थानप्रमुख व्याख्या: सिद्धि स्थान में पंचकर्म की सिद्धि तथा बस्ति कर्म सहित उससे संबंधित विभिन्न विधियों और विषयों का वर्णन मिलता है।
35. आचार्य पुनर्वसु आत्रेय का संबंध किस चिकित्सा परंपरा से माना गया है?
सही उत्तर: आत्रेय परंपराप्रमुख व्याख्या: पुनर्वसु आत्रेय आयुर्वेद की आत्रेय चिकित्सा परंपरा के प्रमुख आचार्य माने जाते हैं। उनके शिष्य अग्निवेश आदि ने उनके उपदेशों को आगे बढ़ाया।
36. अग्निवेश तंत्र के मूल उपदेशदाता किसे माना गया है?
सही उत्तर: पुनर्वसु आत्रेयप्रमुख व्याख्या: पुनर्वसु आत्रेय को अग्निवेश तंत्र के मूल उपदेशदाता माना गया है। उनके शिष्य अग्निवेश ने इन उपदेशों को तंत्र के रूप में संकलित किया।
37. चरक संहिता में रोगों के कारण, पूर्वरूप, रूप आदि का अध्ययन किस स्थान में किया गया है?
सही उत्तर: निदान स्थानप्रमुख व्याख्या: चरक संहिता के निदान स्थान में विभिन्न रोगों के कारण, पूर्वरूप, रूप, संप्राप्ति आदि का व्यवस्थित वर्णन किया गया है।
“`
📢 दोस्तों, आपका सुझाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है!
अगर आपको हमारी वेबसाइट में कोई कमी दिखाई देती है या उसे और बेहतर बनाने के लिए आपके पास कोई सुझाव है, तो हमें जरूर बताएं। आपके सुझावों से हम अपनी वेबसाइट को और बेहतर बना सकते हैं।
ताकि आयुर्वेद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अपडेट, MCQs, नोट्स और नई जानकारी आपको सबसे पहले मिलती रहे। 🙏
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दिए गए प्रश्न और उत्तर अभ्यर्थियों की स्मृति (Memory-Based) तथा सामान्य अध्ययन सामग्री पर आधारित हैं। इन्हें केवल शैक्षणिक और परीक्षा तैयारी के उद्देश्य से साझा किया गया है। किसी भी आधिकारिक जानकारी या अंतिम उत्तर कुंजी (Official Answer Key) के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन अवश्य करें।
✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.
📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.

