आयुर्वेद इतिहास Part-4: शार्ङ्गधर संहिता का संपूर्ण सार | AIAPGET & BAMS स्पेशल गाइड

Exam-Oriented Highlights (परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण):
यह लिखें कि AIAPGET, UPSC या State PSC Ayurveda exams में इस विषय से कौन से सवाल बार-बार पूछे जाते हैं।

शार्ङ्गधर संहिता आयुर्वेद इतिहास Part 4 अध्ययन नोट्स
आयुर्वेद इतिहास Part-4: शार्ङ्गधर संहिता का संपूर्ण सार -पूर्वखंड, मध्यखंड और उत्तरखंड के 32 महत्वपूर्ण प्रश्न (व्याख्या सहित)

 

शार्ङ्गधर संहिता: महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (MCQs)

Ye post Sharangdhara Samhita MCQ Notes in Hindi me hai jo AIAPGET aur BAMS exams ke liye banayi gayi hai.

Quick Revision Table (त्वरित संशोधन तालिका):

विषयशार्ङ्गधर संहिता का नियम / मान
मात्रा मानमागध मान को श्रेष्ठ माना गया है
क्वाथ निर्माण1 भाग द्रव्य + 8 भाग जल (1/4 शेष)
हिम निर्माण1 भाग चूर्ण + 6 भाग शीतल जल
वटी प्रमाण1 कर्ष (12 ग्राम / चने के समान)

 

 

प्रश्न संख्या 1

वैद्यकीय कल्पना, औषध निर्माण, औषध मात्रा तथा चिकित्सकीय प्रयोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण ग्रंथ कौन सा है?

A. शार्ङ्गधर संहिता

B. चरक संहिता

C. सुश्रुत संहिता

D. ब्रह्म संहिता

सही उत्तर: A. शार्ङ्गधर संहिता

व्याख्या: वैद्यकीय कल्पना का प्रमुख ग्रंथ शार्ङ्गधर संहिता है। इसमें औषध निर्माण, औषध मात्रा आदि का महत्वपूर्ण प्रयोग बताया गया है।

प्रश्न संख्या 2

शार्ङ्गधर संहिता में कुल कितने अध्याय हैं?

A. 30

B. 25

C. 20

D. 32

सही उत्तर: D. 32 अध्याय

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता आयुर्वेद के महत्वपूर्ण मध्यकालीन ग्रंथों में से एक है। इसमें कुल 32 अध्याय और 2600 श्लोक बताए गए हैं।

प्रश्न संख्या 3

शार्ङ्गधर संहिता का पूर्वखंड मुख्य रूप से आयुर्वेद के आधारभूत सिद्धांतों और निदान पद्धतियों पर केंद्रित है। इसमें 7 अध्यायों के अंतर्गत नाड़ी परीक्षा, परिभाषा-प्रकरण और औषध सेवन के समय जैसे मौलिक विषयों का गहन विवरण मिलता है, जो प्रत्येक चिकित्सक के लिए मूलभूत आधार हैं।

शार्ङ्गधर संहिता को कितने प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है?

A. 2

B. 5

C. 7

D. 3

सही उत्तर: D. 3

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता को 3 प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है—पूर्वखंड, मध्यखंड और उत्तरखंड।

प्रश्न संख्या 4

शार्ङ्गधर संहिता के पूर्वखंड में कितने अध्याय बताए गए हैं?

A. 5

B. 8

C. 7

D. 12

सही उत्तर: C. 7 अध्याय

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता के पूर्वखंड में 7 अध्याय, मध्यखंड में 12 अध्याय और उत्तरखंड में 13 अध्याय हैं। इस प्रकार कुल 32 अध्याय होते हैं।

चरक और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन बृहत्त्रयी ग्रंथों में नाड़ी परीक्षा का कोई प्रत्यक्ष या विस्तृत विवरण नहीं मिलता है। शार्ङ्गधर संहिता इतिहास का ऐसा पहला प्रामाणिक ग्रंथ है, जिसने नाड़ी परीक्षा को निदान के एक प्रमुख साधन के रूप में स्थापित किया और इसके विस्तृत नियमों का प्रतिपादन किया।

प्रश्न संख्या 5

आयुर्वेद के आधारभूत विषय, परिभाषाएँ, मात्रा, मान, औषध सेवन, नाड़ी परीक्षा, शरीर संबंधी विषय, आहार तथा रोगों का वर्णन किस संहिता के पूर्वखंड में मिलता है?

A. माधव निदान

B. चरक संहिता

C. सुश्रुत संहिता

D. शार्ङ्गधर संहिता

सही उत्तर: D. शार्ङ्गधर संहिता


व्याख्या:
आचार्य शार्ङ्गधर द्वारा रचित शार्ङ्गधर संहिता के पूर्वखंड (7 अध्याय) में आधारभूत विषय, परिभाषाएँ, नाड़ी परीक्षा और आहार-रोगों का वर्णन मिलता है।

प्रश्न संख्या 6

शारंगधर संहिता का सबसे महत्वपूर्ण भाग किस खंड को कहा जाता है?

A. पूर्वखंड

B. मध्यखंड

C. उत्तरखंड

D. सभी

सही उत्तर: B. मध्यखंड

व्याख्या: मध्यखंड को शार्ङ्गधर संहिता का हृदय या सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है क्योंकि इसमें विभिन्न औषध निर्माण (भैषज्य कल्पना) और कषाय कल्पनाओं का विस्तृत वर्णन है।

शार्ङ्गधर संहिता के मध्यखंड के चतुर्थ अध्याय (पंचविध कषाय कल्पना) से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें स्वरस, कल्क, क्वाथ, हिम और फाण्ट के पचने का क्रम (गुरु-लघु भाव) तथा इनमें जल मिलाने के अनुपातों को विशेष रूप से याद रखें।

प्रश्न संख्या 7

शारंगधर संहिता में फाण्ट आदि कल्पनाओं का वर्णन किस अध्याय एवं खंड में किया गया है?

A. मध्यखंड — स्वरसादि कल्पना अध्याय

B. मध्यखंड — क्वाथ कल्पना अध्याय

C. मध्यखंड — फाण्टादि कल्पना अध्याय

D. मध्यखंड — हेम कल्पना अध्याय

सही उत्तर: C. मध्यखंड — फाण्टादि कल्पना अध्याय

व्याख्या: मध्यखंड के फाण्टादि कल्पना अध्याय में गर्म जल का प्रयोग करके औषधीय फाण्ट तैयार करने की विधि का वर्णन किया गया है।

प्रश्न संख्या 8

शारंगधर संहिता में वटी आदि औषधियों के रूपों का वर्णन किस अध्याय में मिलता है?

A. कल्क कल्पना

B. चूर्ण कल्पना

C. वटक कल्पना

D. अवलेह कल्पना

सही उत्तर: C. वटक कल्पना

व्याख्या: मध्यखंड के ‘वटक कल्पना’ अध्याय में वटी (गोली), गुटिका और मोदक आदि के निर्माण और उनके प्रमाण का वर्णन किया गया है।

मध्यखंड में वर्णित आसव और अरिष्ट का अंतर केवल सैद्धांतिक नहीं है। चूंकि आसव बिना काढ़े (कच्चे स्वरस) के संधान से बनता है, इसलिए यह प्रकृति में अधिक तीक्ष्ण और शीघ्र प्रभाव दिखाने वाला होता है। वहीं अरिष्ट काढ़े से बनने के कारण अधिक सौम्य और पाचक गुणों से भरपूर होता है।

प्रश्न संख्या 9

शारंगधर संहिता के मध्यखंड में धातु शुद्धि विषय किन बातों के लिए प्रसिद्ध है?

A. धातुओं के शोधन से संबंधित

B. आसव-अरिष्ट से संबंधित

C. औषधीय घृत-तेल से संबंधित

D. अवलेह निर्माण से संबंधित

सही उत्तर: A. धातुओं के शोधन से संबंधित

व्याख्या: मध्यखंड का धातु शुद्धि/शोधन अध्याय विभिन्न धातुओं, रसों और खनिजों के शोधन तथा उन्हें औषधि रूप में प्रयोग करने के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न संख्या 10

शारंगधर संहिता के उत्तरखंड में कुल कितने अध्याय माने गए हैं?

A. 11

B. 12

C. 13

D. 14

सही उत्तर: C. 13 अध्याय

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता के उत्तरखंड में कुल 13 अध्याय हैं, जिनमें मुख्य रूप से पंचकर्म और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का वर्णन है।

प्रश्न संख्या 11

शारंगधर संहिता का प्रमुख काल कौन-सा माना जाता है?

A. 11वीं शताब्दी ईस्वी

B. 12वीं शताब्दी ईस्वी

C. 13वीं शताब्दी ईस्वी

D. 16वीं शताब्दी ईस्वी

सही उत्तर: C. 13वीं शताब्दी ईस्वी

व्याख्या: आचार्य शार्ङ्गधर मध्यकालीन आयुर्वेद के विद्वान थे और उनके ग्रंथ ‘शार्ङ्गधर संहिता’ का रचना काल 13वीं शताब्दी ईस्वी माना जाता है।

प्रश्न संख्या 12

मूल सिद्धांत, परिभाषा, नाड़ी, आहार और रोग से संबंधित विषय शार्ङ्गधर संहिता के किस खंड में समाविष्ट हैं?

A. मध्यखंड

B. पूर्वखंड

C. उत्तरखंड

D. सभी

सही उत्तर: B. पूर्वखंड

व्याख्या: पूर्वखंड के 7 अध्यायों में आयुर्वेद के मूल सिद्धांत, पारिभाषिक शब्द, नाड़ी परीक्षा, आहार और सामान्य रोगों का वर्णन समाविष्ट है।

प्रश्न संख्या 13

औषध निर्माण एवं भैषज्य कल्पना शार्ङ्गधर संहिता के किस खंड में समाहित है?

A. मध्यखंड

B. पूर्वखंड

C. उत्तरखंड

D. परमार्थ खंड

सही उत्तर: A. मध्यखंड

व्याख्या: मध्यखंड में कुल 12 अध्याय हैं, जो पूरी तरह से औषध निर्माण (भैषज्य कल्पना), स्वरस, क्वाथ, चूर्ण, अवलेह, तैल और आसव-अरिष्ट आदि पर केंद्रित हैं।

प्रश्न संख्या 14

पंचकर्म एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ शार्ङ्गधर संहिता के किस खंड में की जाती हैं?

A. पूर्वखंड

B. मध्यखंड

C. उत्तरखंड

D. उपयुक्त में से कोई नहीं

सही उत्तर: C. उत्तरखंड

व्याख्या: उत्तरखंड के 13 अध्यायों में पंचकर्म (वमन, विरेचन, नस्य, बस्ती) एवं अन्य बाह्य तथा आभ्यंतर चिकित्सकीय उपक्रमों का वर्णन है।

प्रश्न संख्या 15

रक्तस्राव, रक्तमोक्षण से संबंधित विषयों तथा उचित मात्रा, लक्षण आदि का वर्णन शार्ङ्गधर संहिता के किस अध्याय में मिलता है?

A. गण्डूषादि विधि

B. लेपादि विधि

C. शोणितस्राव विधि

D. नेत्र प्रसाधन विधि

सही उत्तर: C. शोणितस्राव विधि

व्याख्या: उत्तरखंड का 12वाँ अध्याय ‘शोणितस्राव विधि’ है। इसमें आचार्य शार्ङ्गधर ने रक्तस्राव, सिरावेध (रक्तमोक्षण) की मात्रा, लक्षण और सावधानियों का वर्णन किया है।

प्रश्न संख्या 16

मुख एवं कंठ से संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का वर्णन शार्ङ्गधर संहिता के किस अध्याय में मिलता है?

A. धूमपान विधि

B. गण्डूषादि विधि

C. लेपादि विधि

D. शोणितस्राव विधि

सही उत्तर: B. गण्डूषादि विधि

व्याख्या: उत्तरखंड के अध्याय 10 (गण्डूषादि विधि) में मुख, कंठ तथा दंत रोगों के निवारण हेतु गण्डूष, कवल आदि मुख-शोधक प्रक्रियाओं का विवरण है।

प्रश्न संख्या 17

शार्ङ्गधर संहिता के अनुसार रस एवं विभिन्न द्रव्यों के शोधन और मारण से संबंधित विषयों का वर्णन किस अध्याय एवं खंड में मिलता है?

A. रसादि शोधन मारण कल्पना — मध्यखंड

B. धातुशुद्धि — मध्यखंड

C. सन्धान कल्पना — मध्यखंड

D. सहाय कल्पना — मध्यखंड

सही उत्तर: A. रसादि शोधन मारण कल्पना — मध्यखंड

व्याख्या: मध्यखंड का 12वाँ अध्याय ‘रसादि शोधन मारण कल्पना’ है, जिसमें पारद, रसौषधियों तथा धातुओं के शोधन और भस्म (मारण) बनाने की विधियाँ दी गई हैं।

प्रश्न संख्या 18

शार्ङ्गधर संहिता के रचयिता के पिता का नाम क्या था?

A. राघवदेव

B. दामोदर

C. चक्रपाणि

D. हेमाद्रि

सही उत्तर: B. दामोदर

व्याख्या: आचार्य शार्ङ्गधर के पिता का नाम दामोदर तथा उनके पितामह (दादा) का नाम राघवदेव था।

प्रश्न संख्या 19

सर्वप्रथम नाड़ी परीक्षा का विस्तृत वर्णन किस ग्रंथ में मिलता है?

A. चरक संहिता

B. सुश्रुत संहिता

C. शार्ङ्गधर संहिता (पूर्वखंड)

D. अष्टांग हृदय

सही उत्तर: C. शार्ङ्गधर संहिता (पूर्वखंड)

व्याख्या: आयुर्वेद साहित्य में नाड़ी परीक्षा का सबसे पहला और व्यवस्थित विस्तृत वर्णन शार्ङ्गधर संहिता के पूर्वखंड (अध्याय 3) में प्राप्त होता है।

प्रश्न संख्या 20

आयुर्वेद में ‘पंचविध कषाय कल्पना’ के अंतर्गत कौन-कौन आते हैं?

A. स्वरस, कल्क, क्वाथ, हिम, फाण्ट

B. चूर्ण, वटी, अवलेह, घृत, तैल

C. आसव, अरिष्ट, स्वरस, क्वाथ, फाण्ट

D. स्नेह, संधान, धातु, रस, लेप

सही उत्तर: A. स्वरस, कल्क, क्वाथ, हिम, फाण्ट

व्याख्या: मध्यखंड के अध्याय 4 में पंचविध कषाय कल्पनाओं का वर्णन है, जिनमें स्वरस सबसे गुरु (पचने में भारी) माना गया है।

प्रश्न संख्या 21

क्वाथ (काढ़ा) निर्माण में द्रव्य के साथ जल की कितनी मात्रा मिलाई जाती है?

A. 4 गुना

B. 8 गुना

C. 16 गुना

D. 2 गुना

सही उत्तर: B. 8 गुना

व्याख्या: सामान्य नियम के अनुसार 1 भाग औषध द्रव्य में 8 भाग जल मिलाकर धीमी आँच पर पकाया जाता है और चतुर्थांश (1/4 भाग) शेष रहने पर छान लिया जाता है।

प्रश्न संख्या 22

स्नेह (घृत/तैल) सिद्धि के प्रमुख लक्षण कौन-कौन से हैं?

A. फेनोद्गम

B. वर्ति परीक्षा

C. शब्दहीनता

D. ये सभी

सही उत्तर: D. ये सभी

व्याख्या: स्नेह पाक सिद्ध होने पर घृत में फेन का शांत होना, तैल में फेन का उत्पन्न होना, उँगली पर बत्ती (वर्ति) बनना और अग्नि पर डालने पर चटचट शब्द न होना प्रमुख लक्षण हैं।

प्रश्न संख्या 23

आसव और अरिष्ट में मुख्य अंतर क्या है?

A. आसव बिना क्वाथ के तथा अरिष्ट क्वाथ (काढ़े) से बनता है

B. गुड़ बनाम शर्करा का प्रयोग

C. स्वरस बनाम क्वाथ

D. दोनों में कोई अंतर नहीं है

सही उत्तर: A. आसव बिना क्वाथ के तथा अरिष्ट क्वाथ (काढ़े) से बनता है

व्याख्या: मध्यखंड के संधान कल्पना अध्याय के अनुसार, बिना काढ़े (कच्चे द्रव्यों/स्वरस) से आसव और पकाए गए क्वाथ से अरिष्ट बनाया जाता है।

प्रश्न संख्या 24

शार्ङ्गधर संहिता के अनुसार वटी (गोली) का प्रमाण कितना माना गया है?

A. मटर के समान

B. चने के समान (1 कर्ष / 12 ग्राम)

C. बेर के समान

D. आंवले के समान

सही उत्तर: B. चने के समान (1 कर्ष / 12 ग्राम)

व्याख्या: वटक कल्पना में वटी का सामान्य प्रमाण 1 कर्ष अथवा चने के आकार के समान निर्दिष्ट किया गया है।

प्रश्न संख्या 25

व्यावहारिक औषध निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ ‘मान’ (Measurement System) कौन सा माना गया है?

A. मागध मान

B. कालिंग मान

C. शार्ङ्गधर मान

D. चरक मान

सही उत्तर: A. मागध मान

व्याख्या: आचार्य शार्ङ्गधर के अनुसार औषध निर्माण और व्यावहारिक कार्यों के लिए ‘मागध मान’ को ही सर्वश्रेष्ठ और ग्राह्य माना गया है।

प्रश्न संख्या 26

“अनु पश्चात् सह वा पीयते इति अनुपानम्” (अनुपान) की परिभाषा किस खंड में दी गई है?

A. पूर्वखंड (दीपन पाचन अध्याय)

B. मध्यखंड (चूर्ण अध्याय)

C. उत्तरखंड (स्नेहपान अध्याय)

D. पूर्वखंड (भैषज्याख्यान अध्याय)

सही उत्तर: A. पूर्वखंड (दीपन पाचन अध्याय)

व्याख्या: पूर्वखंड के दीपन-पाचन एवं औषध सेवन काल से संबंधित वर्णन में अनुपान की यह प्रामाणिक परिभाषा दी गई है।

प्रश्न संख्या 27

शार्ङ्गधर संहिता के उत्तरखंड का प्रथम अध्याय कौन सा है?

A. स्नेहपान विधि

B. स्वेद विधि

C. वमन विधि

D. विरेचन विधि

सही उत्तर: A. स्नेहपान विधि

व्याख्या: उत्तरखंड का पहला अध्याय ‘स्नेहपान विधि’ है, जहाँ से पंचकर्म पूर्वकर्म उपक्रमों की शुरुआत होती है।

प्रश्न संख्या 28

शार्ङ्गधर संहिता के अनुसार अंजन के कुल कितने प्रकार बताए गए हैं?

A. 2

B. 3 (गुटिका, रसक्रिया, चूर्ण)

C. 4

D. 5

सही उत्तर: B. 3 (गुटिका, रसक्रिया, चूर्ण)

व्याख्या: नेत्र उपचार के लिए अंजन के 3 प्रकार—गुटिका अंजन, रसक्रिया अंजन, और चूर्ण अंजन बताए गए हैं।

प्रश्न संख्या 29

शार्ङ्गधर संहिता पर प्रसिद्ध टीकाएँ कौन सी हैं?

A. आयुर्वेद रसायन

B. दीपिका और गूढ़ार्थ दीपिका

C. सर्वांगसुन्दरा

D. मधुकोष

सही उत्तर: B. दीपिका और गूढ़ार्थ दीपिका

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता पर दो सबसे प्रसिद्ध टीकाएँ उपलब्ध हैं—आढमल्ल कृत ‘दीपिका’ और काशीराम कृत ‘गूढ़ार्थ दीपिका’।

प्रश्न संख्या 30

हिम कल्पना तैयार करने के लिए चूर्ण और जल का क्या अनुपात होता है?

A. 1:4

B. 1:6

C. 1:8

D. 1:16

सही उत्तर: B. 1:6

व्याख्या: हिम कल्पना बनाने हेतु 1 भाग औषध चूर्ण में 6 भाग शीतल जल मिलाकर रात भर रखा जाता है और प्रातः छानकर प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न संख्या 31

शार्ङ्गधर संहिता को किस श्रेणी का ग्रंथ माना जाता है?

A. बृहत्त्रयी

B. लघुत्रयी

C. मध्यकालीन संग्रह ग्रंथ

D. B और C दोनों

सही उत्तर: D. B और C दोनों

व्याख्या: शार्ङ्गधर संहिता आयुर्वेद की ‘लघुत्रयी’ (माधव निदान, शार्ङ्गधर संहिता, भावप्रकाश) का प्रमुख हिस्सा है तथा यह एक महत्वपूर्ण मध्यकालीन संग्रह ग्रंथ भी है।

प्रश्न संख्या 32 (अवलेह सिद्धि)

अवलेह (चाटने योग्य योग) के पूर्ण रूप से सिद्ध होने के क्या लक्षण हैं?

A. तन्तुमत्वम् (तार बनना)

B. अप्सु मज्जनम् (जल में डूब जाना)

C. पीडिते मुद्रा (अंगुली से दबाने पर छाप बनना)

D. ये सभी

सही उत्तर: D. ये सभी

व्याख्या: अवलेह पाक सिद्ध होने पर उसमें तार बनने लगता है, जल में डालने पर नीचे बैठ जाता है, तथा गंध, वर्ण और रस की उचित उत्पत्ति होती है।

आपको शार्ङ्गधर संहिता का कौन सा अध्याय सबसे चुनौतीपूर्ण लगता है? कमेंट्स में बताएं

 

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Written by Ayurved Study Hub Team | Reviewed by Our Ayurveda Expert Panel
Hamare sabhi lekh hamari expert team dwara likhe aur janche jate hain taaki aapko sahi aur puri jankari mile. Ye jankari keval shiksha ke liye hai.

 

✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.

📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.

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