Rajasthan NAM Paper 2026 (Part 3): Questions 61–80 with Answers Memory Base

 Rajasthan NAM Paper 2026 (Part 3): Questions 61–80 with Answers

नोट: यह प्रश्न स्मृति (Memory-Based) पर आधारित हैं। इसलिए प्रश्न, विकल्प या उत्तर में अनजाने में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं। यदि आपको किसी प्रश्न या उत्तर में कोई गलती दिखाई दे, तो कृपया हमें अवश्य बताएं। हम उसे शीघ्र सुधार देंगे।

61. अस्थमा का सामान्य लक्षण कौन-सा है?
सही उत्तर: घरघराहट (Wheezing)

प्रमुख व्याख्या: अस्थमा में श्वसन मार्गों में संकुचन और सूजन के कारण सांस लेने में कठिनाई, खांसी और विशेष रूप से घरघराहट (Wheezing) जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

 

62. आयुर्वेद के अनुसार शरीर के षडंगों में कौन सम्मिलित नहीं है?
सही उत्तर: उरः (Chest)

प्रमुख व्याख्या: आयुर्वेद में शरीर के षडंगों में शिर, चारों अंग तथा मध्य शरीर का वर्णन किया गया है। उरः को पृथक षडंग के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

63. प्रतिमार्गाहरण चिकित्सा किस रोग में कही गई है?
सही उत्तर: रक्तपित्त (Raktapitta)

प्रमुख व्याख्या: रक्तपित्त में दोषों को उनके मार्ग के विपरीत दिशा से बाहर निकालने की चिकित्सा को प्रतिमार्गाहरण कहा गया है। यह रक्तपित्त की चिकित्सा में विशेष रूप से वर्णित है।

64. शुक्ति किसका पर्याय है?
सही उत्तर: ½ पल (½ Pala)

प्रमुख व्याख्या: शुक्ति मात्रा-विज्ञान में प्रयुक्त एक मात्रक है, जिसे आधा पल के समान माना गया है। आयुर्वेद में औषधियों की मात्रा निर्धारित करने के लिए विभिन्न मानों का वर्णन मिलता है।

65. इत्रिफल यूनानी औषधि की किस प्रकार की तैयारी है?
सही उत्तर: अर्धठोस (Semisolid)

प्रमुख व्याख्या: इत्रिफल यूनानी चिकित्सा पद्धति की अर्धठोस (Semisolid) औषधीय तैयारी है।

66. ट्रेकोमा मुख्य रूप से नेत्र के किस भाग को प्रभावित करता है?
सही उत्तर: नेत्रश्लेष्मला (Conjunctiva)

प्रमुख व्याख्या: ट्रेकोमा मुख्य रूप से नेत्रश्लेष्मला को प्रभावित करने वाला संक्रामक रोग है। यह लंबे समय तक रहने पर आंखों की दृष्टि को भी प्रभावित कर सकता है।

67. आयुर्वेद के अनुसार अधिकांश रोगों का मूल कारण क्या है?
सही उत्तर: प्रज्ञापराध (Prajnaparadha)

प्रमुख व्याख्या: आयुर्वेद में प्रज्ञापराध को रोगों के प्रमुख कारणों में माना गया है। इसमें बुद्धि, धृति और स्मृति के विपरीत आचरण करना शामिल है।

68. नेत्रों के पोषण एवं बलवर्धन हेतु निम्न में से कौन-सी क्रियाकल्प विधि प्रयुक्त होती है?
सही उत्तर: तर्पण (Tarpana)

प्रमुख व्याख्या: तर्पण नेत्रों के पोषण, बलवर्धन और नेत्र संबंधी विकारों में उपयोग की जाने वाली प्रमुख क्रियाकल्प विधि है।

69. होम्योपैथी में पोटेंसीकरण का अर्थ क्या है?
सही उत्तर: तनुकरण तथा झटके/घर्षण (Dilution and Succussion/Trituration)

प्रमुख व्याख्या: होम्योपैथी में पोटेंसीकरण की प्रक्रिया में औषधि का क्रमिक तनुकरण तथा झटके (Succussion) या घर्षण (Trituration) किया जाता है।

70. क्वाशियोरकर मुख्यतः किसकी कमी से होता है?
सही उत्तर: प्रोटीन (Protein)

प्रमुख व्याख्या: क्वाशियोरकर मुख्यतः आहार में प्रोटीन की गंभीर कमी के कारण होने वाला कुपोषण है। इसमें शरीर में सूजन, कमजोरी और वृद्धि में रुकावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

71. इनमें से कौन-सी वैक्सीन मुंह से दी जाती है?
सही उत्तर: OPV

प्रमुख व्याख्या: OPV यानी Oral Polio Vaccine मुंह के माध्यम से दी जाती है। यह पोलियो रोग से बचाव के लिए उपयोग की जाती है।

72. डेटाबेस का उपयोग किस लिए किया जाता है?
सही उत्तर: डेटा को संग्रहित और व्यवस्थित करने के लिए

प्रमुख व्याख्या: डेटाबेस का उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा को व्यवस्थित रूप से संग्रहित, प्रबंधित और आवश्यकता के अनुसार प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

73. बस्ती देने के लिए किस स्थिति की सर्वाधिक अनुशंसा की जाती है?
सही उत्तर: बाईं करवट (Left Lateral Position)

प्रमुख व्याख्या: बस्ती देने के लिए रोगी को सामान्यतः बाईं करवट लिटाया जाता है। इस स्थिति में बस्ती द्रव्य को उचित रूप से प्रविष्ट कराने में सहायता मिलती है।

74. दस्तावेज़ बनाने एवं संपादित करने के लिए मुख्य रूप से किस अनुप्रयोग का उपयोग किया जाता है?
सही उत्तर: MS Word

प्रमुख व्याख्या: MS Word एक वर्ड प्रोसेसिंग अनुप्रयोग है, जिसका उपयोग दस्तावेज़ बनाने, संपादित करने और उन्हें विभिन्न प्रारूपों में तैयार करने के लिए किया जाता है।

75. पानीय क्षार किस रोग में वर्जित है?
सही उत्तर: रक्तपित्त

प्रमुख व्याख्या: आयुर्वेद में पानीय क्षार का उपयोग कुछ रोगों में किया जाता है, लेकिन रक्तपित्त में इसे वर्जित माना गया है।

76. श्वसन तंत्र की शारीरिक जांच का पहला चरण कौन-सा है?
सही उत्तर: निरीक्षण (Inspection)

प्रमुख व्याख्या: श्वसन तंत्र की शारीरिक जांच सामान्यतः निरीक्षण से शुरू की जाती है। इसमें रोगी की श्वसन गति, प्रकार और छाती की गति आदि का अवलोकन किया जाता है।

77. गौरीतेज किसका पर्याय है?
सही उत्तर: अभ्रक

प्रमुख व्याख्या: गौरीतेज अभ्रक का एक पर्याय माना गया है। रसशास्त्र में अभ्रक के विभिन्न पर्यायों का वर्णन मिलता है।

78. जलौका का उपयोग रक्त से कौन-सा दोष निकालने के लिए किया जाता है?
सही उत्तर: पित्त

प्रमुख व्याख्या: आयुर्वेद में जलौका द्वारा रक्तमोक्षण को विशेष रूप से पित्तप्रधान विकारों में उपयोगी माना गया है। जलौका के माध्यम से दूषित रक्त को निकालने की प्रक्रिया की जाती है।

79. भ्रूण की हृदय ध्वनि सुनने के लिए सामान्यतः किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
सही उत्तर: फीटोस्कोप (पिनार्ड का स्टेथोस्कोप)

प्रमुख व्याख्या: भ्रूण की हृदय ध्वनि सुनने के लिए फीटोस्कोप, जिसे पिनार्ड का स्टेथोस्कोप भी कहा जाता है, का उपयोग किया जाता है। इसके द्वारा गर्भ में भ्रूण की हृदय गति का आकलन किया जा सकता है।

80. प्लीहा वृद्धि किस धातु के क्षय होने का प्रमुख लक्षण है?
सही उत्तर: मेदक्षय

प्रमुख व्याख्या: दिए गए विकल्पों के अनुसार प्लीहा वृद्धि को मेदधातु के क्षय का प्रमुख लक्षण बताया गया है। आयुर्वेद में धातुओं के क्षय और वृद्धि के विभिन्न लक्षणों का वर्णन किया गया है।

नोट: यह प्रश्न स्मृति (Memory-Based) पर आधारित हैं। इसलिए प्रश्न, विकल्प या उत्तर में अनजाने में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं। यदि आपको किसी प्रश्न या उत्तर में कोई गलती दिखाई दे, तो कृपया हमें अवश्य बताएं। हम उसे शीघ्र सुधार देंगे।
Written by Ayurved Study Hub Team | Reviewed by Our Ayurveda Expert Panel
Hamare sabhi lekh hamari expert team dwara likhe aur janche jate hain taaki aapko sahi aur puri jankari mile. Ye jankari keval shiksha ke liye hai.

सुझाव:

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दिए गए प्रश्न और उत्तर अभ्यर्थियों की स्मृति (Memory-Based) तथा सामान्य अध्ययन सामग्री पर आधारित हैं। इन्हें केवल शैक्षणिक और परीक्षा तैयारी के उद्देश्य से साझा किया गया है। किसी भी आधिकारिक जानकारी या अंतिम उत्तर कुंजी (Official Answer Key) के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन अवश्य करें।

✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.

📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.

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